वो जो होता तो क्या नहीं होता ,
इस ज़माने में कोई तनहा नहीं होता ,
ये दिल ए दोस्त जो उड़ता हैं हवा में ,
रहता जमीं पर तो परेशां नहीं होता ,
गम और ख़ुशी का रिश्ता हैं ऐसे ,
जमीं न होती तो आसमान नहीं होता ,
मजबूरियों ने मुझे उभरने न दिया ,
वर्ना मैं भी "शैदाई" बेमुकां नहीं होता.
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