Monday, 29 November, 2010

जलवा तेरा बिखरा, जिक्र चिराग का भी आया !

आइना इतना भी "शैदाई" मगरूर कहाँ होता हैं !
सच इतनी आसानी से यारो मंजूर कहाँ होता हैं !
जलवा तेरा बिखरा, जिक्र चिराग का भी आया !
जलकर फनाह जो धागा हुआ, मशहूर कहाँ होता हैं !

3 comments:

  1. आपका ब्लॉग पसंद आया....इस उम्मीद में की आगे भी ऐसे ही रचनाये पड़ने को मिलेंगी

    कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-
    http://vangaydinesh.blogspot.com/
    http://dineshsgccpl.blogspot.com/

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  2. आपका ब्लॉग पसंद आया....इस उम्मीद में की आगे भी ऐसे ही रचनाये पड़ने को मिलेंगी

    कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-
    http://vangaydinesh.blogspot.com/
    http://dineshsgccpl.blogspot.com/

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  3. इसी ब्‍लॉग पर
    इस मशहूरी का
    नहीं है कोई मुकाबला।

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