Friday, 7 May, 2010

बाबा साहेब के अहसान को " ऐ भुनाने वालो, भूलो नहीं

सामाजिक परिवर्तन के आन्दोलन में उत्तर प्रदेश ने सर्वदा एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है . बाबा साहेब ने सामाजिक विकास के लिए सरकारी सेवा में आरक्षण का प्राविधान कराया ताकि दलितों को भी बराबरी का अवसर प्राप्त हो और दलितों के आर्थिक विकास हेतु सरकारी सेवा से बेहतर विकल्प आज भी नहीं तैयार कर सके . बाबा साहेब के उपकार को भुनाने स्वर्गीय श्री काशीराम जब एक नोट और एक वोट का नारा लेकर उत्तर प्रदेश आये और बामसेफ नाम की संस्था के तले आकर, सरकारी सेवको से बाबा साहेब के उपकार के प्रति वफादारी दिखाने को कहा तो  निसंदेह सरकारी सेवक ही नहीं उत्तर प्रदेश के दलित समाज का बच्चा साथ हो लिया क्योकि सपना बाबा साहेब का जो पूरा करना था. ये और बात है की  राजनैतिक सामाजिक परिवर्तन के इस आन्दोलन को तन मन धन से सहयोग करने वाला सरकारी सेवक अपनी ही सरकार में मुफ्त का लाभ नहीं लिया, पार्टी चलाने के नाम पर वो काम की कीमत देता रहा जो कोई और सरकार होती तो हराम की दौलत बटोरने वाली कहलाई जाती.


जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी से जिसकी जिनती तैयारी उसकी उतनी भागीदारी का नारा बना , बहुजन आन्दोलन सर्वजन आन्दोलन हो गया . और तैयारी के नाम पर बहुजन समाज जिसको जगह जगह संविधान द्वारा छूट मिलती है, भला सर्वजन के बराबर तैयारी कहाँ कर सकता है , पैसे बटोरने में दलित सरकार दलितों को जायज़ छूट तो दें मगर कुछ नहीं?


अब एक बेटा अपने पिता से यही कहता है कि क्यों दिया था पैसा बामसेफ को , कही निवेश कर दिया होता तो आज अपनी सरकार से अपना ही खरीदने के काम आता .


मेरा सवाल हैं बामसेफ वालो से कि जैसे बाबा साहेब के नाम पर सरकारी कर्मचारियों की जेब काटते थे अब उन कर्मचारियों को मिलने वाले जायज़ लाभ क्यों नहीं दिलाते? उच्च पद पर एक दलित की प्रोन्नति एक पूरी चैन का भला करती है क्योकि आरक्षित सीट पर आरक्षित व्यक्ति का ही चयन और प्रोन्नति की जा सकती हैं. कहाँ है बैक लोग़ कोटा जो पूरा होने से पहले सर्वजन को लाभ दिखाने के लिए कोने में सुलाया दिया गया हैं?


किस लिए और क्यों त्याग करे दलित ताकि एक जीवित अपनी मूर्ति लगा कर खुश होता रहें और बाकि रोते रहें?


बाबा साहेब के अहसान को " ऐ भुनाने वालो, भूलो नहीं कम से कम बाबा साहेब की एक बात तो मानो उत्तर प्रदेश के दलित सरकारी सेवको को उनका जायज़ हक दिला कर पहले खुद तो खुद के साथ न्याय करना सीखो ताकि घर में तो विश्वास जीवित रहे.

2 comments:

  1. Har cheez ke do pahlu hote hain..bhunane wale koyi na koyi pahlu bhunate hi rahenge..aise log bas taak me rahte hain,ki,oont kis karvat baithta hai..aur lete hain karvat badal!

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  2. vikasji aapka blog badhiya he.netagiri utarprdesh ke logo ke khoon me hoti he.
    ambedkri andolan ko u.p ke dlito ne sahi mayne me us ki manjil tk phuchane me kasiram aur mayavati ko tan-man-dhan se sahyog diya.ab ek aur kranti baba ke gdaro ke jute maro salo ko ke nare ke sath ho jaye.jaibhim.

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